पत्नी की प्रताड़नाओं सेे हर चार मिनट में एक पुरुष आत्महत्या को मजबूर

संजय त्रिपाठी | इंदौर

भारतीय संविधान में स्त्री-पुरुष में समानता की बात दर्ज होने एवं तथाकथित रूप से भारतीय समाज को पुरुष प्रधान माने जाने के बावजूद देश में पुरुषों की स्थिति कितनी दयनीय है, इसका अंदाजा इसी से लग जाता है कि यहां पत्नी की प्रताड़नाओं के चलते हर चार मिनट में एक पुरुष आत्महत्या करता है। एनसीआरबी (नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो) की रिपोर्ट एवं पुरुष अधिकारों के लिए कार्यरत संस्था पौरुष के अनुसार देशभर में पुरुषों की आत्महत्या की दर, जो सन् 2005 में 52 हजार 589 प्रतिवर्ष थी, वह 2018 में बढ़कर 1 लाख 52 हजार 307 हो चुकी है। सन् 2005 से 2018 तक कुल 13 साल में यह संख्या 11 लाख 96 हजार 587 हो चुकी है, जो तथाकथित महिला आत्महत्या की दर से साढ़े चार गुना अधिक है। नेशनल हेल्थ प्रोफाइल के अनुसार भारत में औसत जीवन प्रत्याशा 68.35% है। इंदौर की संस्था पौरुष (पीपुल अगेंस्ट अनइक्वल रूल्स यूज्ड टू शेल्टर हैरासमेंट) एवं एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार देशभर में हर चार मिनट में एक पुरुष महिला के झूठे इल्जामों के कारण आत्महत्या कर रहा है, वहीं दूसरी ओर हर डेढ़ मिनट में देश में महिला द्वारा पुरुष को झूठे केस में फंसाने की धमकी, प्रताड़ना, थाना, कोर्ट आदि की धौंस दी जाती है।

संस्था पौरुष के अध्यक्ष अशोक दशोरा का कहना है कि देश में महिलाओं के लिए करीब 5 दर्जन कानून होने एवं डेढ़ दर्जन से अधिक महिला हेल्प प्रावधान होने से उद्दंड एवं आपराधिक किस्म की महिलाओं द्वारा कानून का दुरुपयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है। इसके कारण प्रताड़ित पुरुषों की सुनवाई कहीं भी हो पाती और अवसादग्रस्त होकर वे आत्महत्या करने को विवश होते हैं। पुलिस एवं प्रशासन द्वारा इन आत्महत्याओं को महिला आयोग व नारी संगठनों के दबाव में आकर अलग तरह से मीडिया के समक्ष उजागर किया जाता है। दुनियाभर में प्रतिवर्ष 9 से 12 लाख लोग आत्महत्या करते हैं।

भारत में धारा 309 (आईपीसी) आत्महत्या के प्रयास हेतु दंडनीय अपराध माना जाता था, लेकिन 29 मई 2017 को जारी शासकीय अधिसूचना के तहत अब इसे गैर आपराधिक माना गया है। आत्महत्या के प्रयास के मामले में भारत विश्व में दूसरे स्थान पर है। 2009 में सबसे ज्यादा आत्महत्या के मामले पश्चिम बंगाल में दर्ज हुए और वह देश में पहले क्रम पर था, जबकि मप्र पांचवें क्रम पर रहा।

बढ़ती आत्महत्या के ये हैं प्रमुख कारण

2017 में धारा 309 खत्म करने और 2018 में जारकर्म की धारा 497 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा खत्म किए जाने के बाद पुरुष आत्महत्या की दर 8 से बढ़कर 12 प्रतिशत हो गई। भारत में मानसिक स्वास्थ्य के इलाज हेतु न तो कोई चिकित्सकीय प्रावधान है और न ही भावी योजना।

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