‘अहमदाबाद में 12 स्थानों पर इस काले कानून की प्रतियां जलाकर सीएए का विरोध करेंगे’- जिग्नेश मेवानी

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। सीएए पर हर तबका अपने स्तर पर समर्थन तथा प्रतिरोध कर रहा है। जिसके विरोध में विद्यालय से लेकर आम जनता भी सड़क पर उतर चुकी है। इसी क्रम में बयानबाज़ी का सिलसिला भी ज़ोर पर है वहीं निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी का बयान आया है।

निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी और किसानों, महिलाओं, मजदूरों, आदिवासी, मछुआरों, खानाबदोश और निरंकुश जनजातियों समेत कई स्वैच्छिक संगठनों ने घोषणा की कि वे 10 जनवरी को भाजपा के बाद अहमदाबाद में 12 स्थानों पर नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) की प्रतियां जलाएंगे।

संगठनों ने सीएए और राज्य में प्रस्तावित नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (एनआरसी) और नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) के खिलाफ एक असहयोग आंदोलन शुरू करने का भी संकल्प लिया।

मेवानी ने कहा, “जब गुजरात विधानसभा में प्रस्ताव (सीएए का समर्थन) पारित किया जायेगा, हमारे संगठन अहमदाबाद में लगभग 12 स्थानों पर इस काले कानून की प्रतियां जलाकर सीएए का विरोध करेंगे।”

राज्य सरकार ने 10 जनवरी को गुजरात विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है जिसमें सीएए को समर्थन देने का प्रस्ताव लाया जाएगा। मेवानी ने बुधवार को यहां बैठक आयोजित करने वाले संगठनों की ओर से मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा, “हम सीएए से संबंधित एक प्रस्ताव के विरोध में’ वी द पीपल ऑफ इंडिया ‘के अनौपचारिक बैनर तले एक साथ आए हैं। हम सीएए, एनआरपी और एनआरसी का समर्थन नहीं करने जा रहे हैं।”

ख़ानाबदोश और निरंकुश जनजातियों के नेता डैक्सिन छारा ने कहा, “उनके समुदाय के किसी भी सदस्य के पास 1970 से पहले का रिकॉर्ड होना असंभव है। मुस्लिम समुदाय ने इस देश के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान दिया है। वे देश को फासीवादियों से बचाने के उद्देश्य से सड़क पर उतरे हैं।”

दक्षिण गुजरात के तापी जिले के एक वरिष्ठ आदिवासी अशोक चौधरी ने कहा कि उनके परिवार ने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया था। आजादी के बाद, यह विश्वास था कि हर कोई स्वतंत्रता की भावना महसूस करेगा। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में हमारे अधिकारों को एक के बाद एक छीन लिया जा रहा है। अब वह स्थिति आ गई है जहाँ हमें अपनी नागरिकता साबित करने के लिए कहा जा रहा है।

इस बैठक में कई नागरिक अधिकार और सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल थे, जिनमें वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद याग्निक, किसान नेता जयेश पटेल, पूर्व विधायक कानू कलसरिया, नाहेदा शेख, प्रफुल वसावा, कल्पना वागडेकर, पाउलोमी मिस्त्री, भावना रामराखियानी, कौसर अली सैय्यद शामिल थे।

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