इस ऐप से महिलाएं बिना थाने गए कर सकेंगी रेप की रिपोर्ट

भारत में महिलाएं यौन दुर्व्यवहार की शिकायत अब एक मोबाइल ऐप के जरिए आसानी से कर सकेंगी और वो भी अपनी पहचान बताए बिना। इसके लिए उन्हें अब थाने का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।

‘स्मैशबोर्ड ऐप’ के जरिए महिलाएं कानूनी मदद ले सकेंगी और साथ ही उन्हें मेडिकल सुविधाएं भी दी जाएंगी। यह ऐप 15 जनवरी को लॉन्च होने वाला है। ‘स्मैशबोर्ड ऐप’ के जरिए महिलाएं उन मुद्दों की रिपोर्टिंग भी कर सकेंगी जिनकी रिपोर्टिंग आमतौर पर नहीं हो पाती है।

ऐप की को-फाउंडर नूपूर तिवारी का दावा है कि यह पूरी तरह से प्राइवेट और इंक्रिप्टेट होगा। इस ऐप के जरिए यौन पीड़ित महिलाएं फोटो, स्क्रीनशॉट, कोई डॉक्यूमेंट, वीडियो और ऑडियो सबूत के तौर पर सेव कर सकेंगी। उन्होंने कहा कि स्मैशबोर्ड एप यूजर की लोकेशन को ट्रैक नहीं करेगा। साथ ही डेटा के साथ किसी तरह की कोई छेड़छाड़ भी नहीं होगी। ऐप के जरिए महिलाएं डायरी बना सकती हैं, अपने ऊपर हुए दुराचार की पूरी डिटेल डाल सकती हैं। पीड़ित महिलाएं पत्रकारों की भी मदद ले सकेंगीं।

नुपुर तिवारी के मुताबिक, “ब्लॉकचेन की मदद से इस ऐप को बनाया गया है और इससे पीड़िताएं यौन उत्पीड़न की रिपोर्ट सुरक्षित महसूस करते हुए कर सकती हैं।” गौरतलब है कि केंद्र सरकार की ओर से हाल ही में जारी आंकड़ों के मुताबिक 2017 में सिर्फ 90 दिनों में करीब 32 हजार रेप के केस दर्ज हुए हैं, लेकिन न्याय प्रकिया सुस्त होने की वजह से कई पीड़िताएं अपने ऊपर हुए अत्याचार की पुलिस में रिपोर्ट नहीं करा पाती हैं।

इस एप्लिकेशन का उद्देश्य है ऐसा समुदाय बनाना जो “महिलाओं को पितृसत्ता से लड़ने के लिए” तैयार करेगा। महिलाओं के लिए ऑनलाइन समुदाय बनाने की उम्मीद से यह ऐप बनाया गया है। पीड़िताओं को यह ऐप डॉक्टरों, वकीलों, पत्रकारों और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की पूरी मदद उपलब्ध कराएगा।

क्या है ब्लॉकचेन तकनीक?

ब्लॉकचेन तकनीक मौजूदा वक्त की बड़ी जरूरत है। यह डेटाबेस एनक्रिप्टेड है और इसे गोपनीय तरीके से दर्ज किया जाता है। इसमें दर्ज जानकारी को हैक करना फिलहाल असंभव है। हर क्षेत्र की गतिविधियों को त्वरित और प्रभावी बनाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। यही कारण है कि भारत में इसे लेकर गतिविधि तेज हो रही है।

हरियाणा सरकार ने ब्लॉकचेन सेंटर गुरुग्राम में स्थापित करने का निर्णय भी लिया है। नुपुर का कहना है, “रेप पीड़िताएं बहुत अकेला महसूस करती हैं, अपनी बात किसी से कह नहीं पाती हैं। सिस्टम में कमी की वजह से संस्थाएं भी उनकी मदद नहीं कर पातीं। इसका खामियाजा पीड़िताओं को उठाना पड़ता है, हमारा ऐप यह कमी दूर करेगा।”

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