निज़ामुद्दीन इलाके से निकली ज़मात ने पूरे हिंदुस्तान काे खतरे में डाला

नई दिल्ली

मौलाना ने मस्जिद बंद नहीं करके जमातियों को भी मुश्किल में डाला

निज़ामुद्दीन के तबलीगी मरकज़ पर छापा मारकर पुलिस ने 1830 लोगों को निकाला, ज़मात में शामिल सभी के बीमार होने का अंदेशा, प्रदेश सहित 15 राज्यों में खतरा, दिल्ली में 24 व तमिलनाडु में 45 ज़माती पॉजि़टिव

निज़ामुद्दीन इलाके का इस्लामिक धार्मिक आयोजन (मरकज़) कोरोना वायरस संक्रमण के सबसे बड़े स्रोत के तौर पर उभरा है। यहां मध्य मार्च में हुए जमात में देश-विदेश से पहुंचे लोगों के जरिए देश के तमाम हिस्सों में कोरोना वायरस फैल गया है, जिनमें कुछ की मौत भी हो चुकी है। दो दिनों में दिल्ली पुलिस को निज़ामुद्दीन के मरकज़ मस्जि़द में 1830 लोग मिले हैं। इनमें से 281 विदेशी हैं।

ज़मात के मौलाना के खिलाफ एफआईआर दर्ज, विदेशियों के टूरिस्ट वीजा पर प्रतिबंध

इन लोगों को अलग-अलग क्वारंटाइन सेंटरों और अस्पतालों के आइसोलेशन वार्डों में भेजा गया है। मरकज़ में रुके 1500 से ज्यादा भारतीयों की जांच में 441 में कोरोना के लक्षण पाए गए हैं, हालांकि इनकी फाइनल रिपोर्ट का इंतजार है। उधर, निज़ामुद्दीन मरकज़ से अलग-अलग राज्यों में कोरोना संक्रमण फैलने का मामला सामने आने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय एक्शन में आ गया है। मंत्रालय ने राज्य सरकारों से रिपोर्ट तलब की है। केंद्र सरकार ने तबलीगी गतिविधियों के लिए विदेशियों के टूरिस्ट वीजा को बैन कर दिया है। सरकार ने पाया है कि विदेश से जलसों में आने वाले तमाम ज़माती टूरिस्ट वीजा पर भारत आते थे और मज़हबी गतिविधियों में हिस्सा लेते थे। तबलीगी ज़मात के मौलाना साद पर केस दर्ज किया गया है।

भोपाल की 3 मस्जि़दों में मिले 36 लोग

दिल्ली के निज़ामुद्दीन इलाके के मरकज़ में रुके मप्र के 107 में से 30 किस शहर के हैं, अब तक यह पता नहीं चल पाया है। सर्वाधिक 36 भोपाल के हैं। दिल्ली से मिली सूची के बाद ऐशबाग और जहांगीराबाद की तीन मस्जि़दों से इन्हे ढूंढा गया और वहीं क्वारंटाइन किया गया है। इंदौर शहर के लिए राहत भरी खबर यह है कि वहां के सिर्फ दो ही लोग इस ज़मात में शामिल थे जिनकी पहचान हो गई है। उज्जैन का कोई व्यक्ति इस ज़मात में शामिल नहीं था। भोपाल और इंदौर के अलावा देवास, बड़वानी गुना, सीहोर, रीवा और विदिशा के लोग भी इस मरकज में शामिल हुए थे। इन शहरों को भी अलर्ट किया गया है।

मौलाना ने कहा, डॉक्टर कहे तो भी मस्जि़द मत छोड़ना

निज़ामुद्दीन मरकज़ के मौलाना साद का एक वीडियो सामने आया है। जिसमे वो हजारों लोगों को कह रहे हैं कि कोरोना से मत डरो। डॉक्टर भी कहे तो मस्जिद मत छोड़ना। यहां मरना सबसे बड़ी बात होगी। इससे मौलाना साद की वो बात भी झूठी साबित हुई कि लोग यहां पर फंसे हुए थे। ये वीडियो 18 मार्च का है। ये वो वक्त है, जब दिल्ली में धारा 144 लगी हुई थी। आयोजन 15 मार्च को ख़त्म होने के बाद भी मौलाना साद ने जानबूझकर लोगों को रोके रखा था।

मप्र में हैं 49 विदेशी जमाती

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि इस साल तबलीगी गतिविधियों के लिए 2100 विदेशी भारत आए। 21 मार्च तक के आंकड़ों के अनुसार इनमें से सबसे ज्यादा 125 जमात वर्कर्स अभी तमिलनाडु में हैं और 115 महाराष्ट्र में हैं। 132 उत्तर प्रदेश में जबकि मध्यप्रदेश में 49 हैं।

ज़मात से यूं फैल रहा संक्रमण

मरकज़ में शामिल दिल्ली के 24, तेलंगाना के 15, अंडमान के 10, तमिलनाडु के 45 लोग पॉजिटिव पाए गए हैं। तेलंगाना में इस कार्यक्रम से लौटे सबसे ज्यादा छह लोगों की मौत हुई है। संक्रमण का कनेक्शन दिल्ली समेत 15 राज्यों से जुड़ रहा है।

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